विविध

शेखचिल्ली: हास्य कथाओं के नायक या आध्यात्मिक गुरु.

शिमला में कार्यरत संजीव शर्मा के रोचक लेख आप इस वेबपत्रिका में पढ़ते ही रहते हैं।  इस बार का यह लेख उनकी कुरुक्षेत्र यात्रा के दौरान थानेश्वर में सूफी संत शेख चिल्ली के मकबरे के 'विज़िट' के बाद का है। संजीव बताते हैं कि ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह स्मारक भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। 

March Towards the End - A Psychological Perspective

Our discerning readers may recall that Dr. Meenakshi Saxena had earlier contributed the widely appreciated article “Dynamics of Ageing – The Psyche of the Elderly.” Prior to that, she wrote “Grief and Healing – Insights from a Clinical Psychologist,” which also resonated deeply with our audience. While today’s article may not be a direct sequel, Dr. Saxena once again brings her psychological lens to a profound and often taboo subject—death. The insightful article explores how stress, resilience, and silent suffering shape the final chapters of life—and how empathy and acceptance can transform the journey towards the end into one of dignity and peace.

वाघा बार्डर से आंखों देखी: वीरता, सम्मान और राष्ट्र गौरव की अमिट अभिव्यक्ति

अगर आप स्वर्ण-मंदिर में माथा टेकने अमृतसर गए हैं तो इस बात की पूरी संभावना है कि आपने  भारत-पाकिस्तान सीमा पर वाघा बॉर्डर पर होने वाला बीटिंग रिट्रीट समारोह देखा हो जिसमें दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बल के जवान अपने-अपने देशों के ध्वजों को समारोह पूर्वक उतारते हैं। यह कार्यक्रम अपनी उर्जा और भव्यता के लिए आम लोगों में ख़ासा लोकप्रिय है। हाल ही में संजीव शर्मा इस कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने इसकी शानदार रपट लिखी है। 

चाँद की बहकी नज़र कह रही है प्यार कर

मनोहर नायक का इस बार का लेख एक ऐसे विषय पर है जिस पर दुनिया की हर भाषा में  संभवत: सबसे अधिक लिखा गया होगा। यदि आपने सोचा कि अच्छा, आज का उनका लेख प्यार/रोमांस और मुहब्बतों पर है तो आप लगभग ठीक हैं किन्तु पूरी तरह ठीक नहीं क्योंकि उनका यह लेख चाँद पर है। क्या 'प्यार-मुहब्बत' की कोई बात चाँद के बिना पूरी हो सकती है? अभी कुछ ही रोज़ पहले पौष की पूर्णिमा के चाँद को निहारते-निहारते मनोहर नायक का मन कहाँ-कहाँ भटका, यह जानने के लिए इस निबंध को पढ़िए। 

देश की सबसे रोमांचक और खतरनाक सड़क जहां मिलता है एनाकोंडा

आजकल शिमला में कार्यरत संजीव शर्मा के रोचक लेख आप इस वेबपत्रिका में पढ़ते ही रहते हैं।  इस बार का उनका लेख शिमला से तिब्बत की सीमा तक जा रही दुनिया की सबसे खतरनाक सड़कों में से एक 'हिंदुस्तान-तिब्बत रोड' पर है जिसका निर्माण इंसानी जीवट की अनूठी मिसाल है।  संजीव का यह लेख ख़ास इसलिए है कि उन्होंने यह लेख कुछ सप्ताह पूर्व ही इस खतरनाक सड़क पर यात्रा के उपरांत लिखा है।  

जनरल जिया-उल-हक, कांग्रेस संस्थापक ए ओ ह्यूम और पूर्व अफगान राष्ट्रपति करज़ई के बीच क्या है कनेक्शन?

संजीव शर्मा आकाशवाणी एवं अन्य सरकारी प्रचार माध्यमों से करीब तीन दशक से जुड़े हैं।  इस क्रम में उनकी तैनाती अलग-अलग शहरों में होती है।  हमने उनकी यह ख़ासियत देखी है कि वह जिस भी शहर में जाते हैं, उसे खूब बारीकी से देखते हैं और एक तरह से उसे प्यार भी करने लगते हैं।  वह इन जगहों के बारे में बहुत मनोयोग से लिखते हैं. 

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RaagDelhi: देश, समाज, संस्कृति और कला पर विचारों की संगत

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