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वाघा बार्डर से आंखों देखी: वीरता, सम्मान और राष्ट्र गौरव की अमिट अभिव्यक्ति

अगर आप स्वर्ण-मंदिर में माथा टेकने अमृतसर गए हैं तो इस बात की पूरी संभावना है कि आपने  भारत-पाकिस्तान सीमा पर वाघा बॉर्डर पर होने वाला बीटिंग रिट्रीट समारोह देखा हो जिसमें दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बल के जवान अपने-अपने देशों के ध्वजों को समारोह पूर्वक उतारते हैं। यह कार्यक्रम अपनी उर्जा और भव्यता के लिए आम लोगों में ख़ासा लोकप्रिय है। हाल ही में संजीव शर्मा इस कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने इसकी शानदार रपट लिखी है। 

चाँद की बहकी नज़र कह रही है प्यार कर

मनोहर नायक का इस बार का लेख एक ऐसे विषय पर है जिस पर दुनिया की हर भाषा में  संभवत: सबसे अधिक लिखा गया होगा। यदि आपने सोचा कि अच्छा, आज का उनका लेख प्यार/रोमांस और मुहब्बतों पर है तो आप लगभग ठीक हैं किन्तु पूरी तरह ठीक नहीं क्योंकि उनका यह लेख चाँद पर है। क्या 'प्यार-मुहब्बत' की कोई बात चाँद के बिना पूरी हो सकती है? अभी कुछ ही रोज़ पहले पौष की पूर्णिमा के चाँद को निहारते-निहारते मनोहर नायक का मन कहाँ-कहाँ भटका, यह जानने के लिए इस निबंध को पढ़िए। 

देश की सबसे रोमांचक और खतरनाक सड़क जहां मिलता है एनाकोंडा

आजकल शिमला में कार्यरत संजीव शर्मा के रोचक लेख आप इस वेबपत्रिका में पढ़ते ही रहते हैं।  इस बार का उनका लेख शिमला से तिब्बत की सीमा तक जा रही दुनिया की सबसे खतरनाक सड़कों में से एक 'हिंदुस्तान-तिब्बत रोड' पर है जिसका निर्माण इंसानी जीवट की अनूठी मिसाल है।  संजीव का यह लेख ख़ास इसलिए है कि उन्होंने यह लेख कुछ सप्ताह पूर्व ही इस खतरनाक सड़क पर यात्रा के उपरांत लिखा है।  

जनरल जिया-उल-हक, कांग्रेस संस्थापक ए ओ ह्यूम और पूर्व अफगान राष्ट्रपति करज़ई के बीच क्या है कनेक्शन?

संजीव शर्मा आकाशवाणी एवं अन्य सरकारी प्रचार माध्यमों से करीब तीन दशक से जुड़े हैं।  इस क्रम में उनकी तैनाती अलग-अलग शहरों में होती है।  हमने उनकी यह ख़ासियत देखी है कि वह जिस भी शहर में जाते हैं, उसे खूब बारीकी से देखते हैं और एक तरह से उसे प्यार भी करने लगते हैं।  वह इन जगहों के बारे में बहुत मनोयोग से लिखते हैं. 

Parathas in the Kitchen with a Magic Flavour

KG has contributed some serious stuff over the last few weeks, ranging from hardcore economy to international affairs, with a sprinkling of an article on artificial intelligence and religion. We could not imagine that his range is so wide that today he has sent us this moving piece reminiscing about the 'Parathas' — the ultimate breakfast of North Indian kitchens — made by his mother. 

गाँधी जंयती २०२५ पर विशेष : गांधी की कला-दृष्टि

पराग मांदले गाँधी जयंती पर हमारे लिए इससे पूर्व भी लेख लिख चुके हैं। पिछले वर्ष का उनका लेख 'गाँधी को  समझने की कुंजी' खूब सराहा गया था। इस बार उन्होंने गांधीजी के बारे में एक अनछुए पहलू को अपने लेख का विषय बनाया है।  पराग मांदले ने इस बार अपने लेख का विषय गांधी की कला-दृष्टि चुना है। लेख को पढ़कर लगता है कि बहुत श्रमपूर्वक उन्होंने हमारे पाठकों के लिए गाँधी जी के कला-विषयक विचारों को संकलित किया है। 

 

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RaagDelhi: देश, समाज, संस्कृति और कला पर विचारों की संगत

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